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Amazing Facts about Bal Thackeray in Hindi

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बहुत कम लोग जानते हैं कि बाला साहब ठाकरे ने अपना कैरियर एक “कार्टूनिस्ट” के रूप में शुरू किया था और उस समय वे एक अंग्रेजी न्यूज पेपर में कार्टून बनाते थे। बाद में उन्होंने “मार्मिक” नाम से अपना एक साप्ताहिक न्यूज पेपर भी निकाला था।

बाला साहब का बचपन का नाम बाल केशव ठाकरे था जो वक्त के साथ-साथ बाला साहब ठाकरे बन गया क्योंकि लोग उनकी बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करते थे।

बालासाहेब ठाकरे को हिंदू हृदय सम्राट भी कहा जाता था वह हमेशा बिना देखे ही भाषण दिया करते थे और उन्हें सुनने के लिए लाखों में भीड़ उमड़ा करती थी।

इस बात को भी कम ही लोग जानते हैं कि बाला साहब ठाकरे मुम्बई को भारत की राजधानी बनाना चाहते थे, उन्होंने इसके लिए 1950 के दशक में काफी कार्य भी किया था।

बाल ठाकरे जब किसी का विरोध करते थे तो दुश्मनों की तरह, और जब तारीफ करते थे तो ऐसे कि जैसे उनसे बड़ा कोई मित्र नही।

 19 जून 1966 को बाल ठाकरे ने शिवाजी पार्क में नारियल फोड़कर अपने दोस्तों के साथ पार्टी बनाई थी “शिवसेना“. जो आज भी चल रही है।

1960 और 1970 के दशक में महाराष्ट्र में “लुंगी हटाओ, पुंगी बचाओ” अभियान चलाया गया. ये स्पेशली बिहारियों के लिए था क्योकिं बाल ठाकरे ने अपने समाचार पत्र के मुख्य पेज पर भी लिख दिया था कि “एक बिहारी, सौ बीमारी“।

अपने भाषणों में बाल ठाकरे अक्सर 2 ही चीजों की खुलकर तारीफ करते थे, एक था “हिटलर” और दूसरा श्रीलंका का आतंकी संगठन “लिट्टे“.

बाला साहब ठाकरे चांदी के सिंहासन पर बैठते थे जहां पर विरोधी भी उनके सामने उनसे नीचे बैठा करते थे और वह किसी को भी खुले आम धमकी देने में माहिर थे।

सन् 1992 में बाबरी मस्जिद ढहा दी गई, तो बाल ठाकरे “आप की अदालत” शो में आए हुए थे जब उनसे कहा जया कि सुना है ये काम शिवसैनिको ने किया है ? तो वो बोले यदि ये काम शिवसैनिकों ने किया है तो यह गर्व की बात है।

 बाल ठाकरे के कुछ स्पेशल शौक थे. सिगार, वाइट वाइन etc. ज्यादातर फोटो या इंटरव्यू में उनके हाथ में पाइप या सिगार होती है. पाइप तो 1995 में दिल के दौरे के बाद छोड़ दी लेकिन सिगार तो मौत के साथ ही छूटी।

1999 में बाल ठाकरे पर 6 साल तक वोट डालने और चुनाव लड़ने पर बैन लगा था। लेकिन बाल ठाकरे ने अपने जीवन में कभी चुनाव नही लड़ा।

बाल ठाकरे ना तो मुख्यमंत्री थे और ना सांसद. फिर भी उन्हें मरने के बाद ‘21 तोपों की सलामी‘ दी गई. जो राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को मिलती है। 

दिमाग के कुछ रोचक तथ्य – Amazing facts about human brain

ओलम्पिक खेलो से जुड़े रोचक तथ्य - amazing facts about olympic in hindi

दुनिया के सबसे पुराने खेल उत्सव ओलम्पिक खेलो (Olympics) का आयोजन इस बार ब्राज़ील के रियो डि जेनेरो में किया जा रहा है. यह एक ऐसा महाकुम्भ है जिसमे दुनियां के ज्यादातर देश भाग लेते है और एक स्वस्थ प्रतियोगिता दिखाते है. आइये जानते है ओलम्पिक खेलो से जुड़े कुछ फैक्ट्स को :

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FACTS ABOUT OLYMPICS IN HINDI

  • ओलम्पिक खेलो (Olympics) की शुरुआत ओलम्पस नामक यूनानी देवता के सम्मान में सबसे पहले 776 ईसा पूर्व में हुई थी. उस समय इसमें नाटक, संगीत, साहित्य, कला, नाटक और जिम्नास्टिक जैसी प्रतियोगिताए आयोजित होती थी.
  • कुछ समय बाद रोम के राजा थियोडोसिस ने इसे मूर्तिपूजा वाला उत्सव करार देकर इस पर रोक लगा दिया.
  • आधुनिक ओलम्पिक खेलो (Olympics) की शुरुआत बैरन कुबर्तिन के प्रयासों से 1896 में एथेंस में हुई और उन्ही के सुझावों पर 23 जून 1914 में ओलम्पिक के झंडा तैयार किया गया.
  • ओलम्पिक (Olympics) का झंडा सफ़ेद सिल्क से बना है जिसपर ओलम्पिक के प्रतिक पांच छल्ले लगे है. ये पांच छल्ले एक दुसरे से जुड़े है. इनमे पहली लाइन में तीन और दूसरी लाइन में दो छल्ले है. इनका रंग है – नीला, पीला, काला, हरा और लाल.
  • झंडे के पांच छल्ले पांचो महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते है. इनमे से नीला गोला यूरोप को, पीला एशिया को, लाल अमेरिका को, काला अफ्रीका को, और हरा ऑस्ट्रेलिया को दर्शाता है.
  • ओलम्पिक (Olympics) के झंडे के छल्लो के लिए इन रंगों को इस्तेमाल करने का एक विशेष कारण है. इनमे इस्तेमाल किये गए रंगों में से कम से कम एक रंग हर देश के झंडे पर मिलता है. इसका सांकेतिक अर्थ है की इस खेल के द्वारा सभी दशो के खिलाडी आपस में मिलते है और एक स्वस्थ प्रतोयोगिता करते है.
  • ओलम्पिक खेलो (Olympics) का आयोजन हर चार साल बाद किया जाता है.
  • प्रथम और द्रितीय विश्व युद्ध (first and second world war) के कारण इन खेलो के आयोजन 1916, 1940 और 1944 में नहीं किया गया था.
  • महिलोओं की ओलम्पिक (Olympics) खेलो में भागीदारी सबसे पहले सन 1900 से हुई.
  • ओलम्पिक खेल (Olympics) समारोह में मार्च पोस्ट के दौरों ओलम्पिक खेलो के जन्मदाता देश ग्रीस की टीम सबसे आगे रहती है जबकि मेजबान देश की टीम सबसे पीछे रहती है.
  • ओलम्पिक में मशाल जलाने की प्रथा की शुरआत 1928 से हुई. यह मशाल सूरज की किरणों के द्वारा जलाई जाती है.
  • भारत की ओर से ओलम्पिक खेलो में सबसे पहले 1900 में भाग लिया गया जिसमे भारत ने एथलेटिक्स में दो सिल्वर मैडल जीते.

Chocolate Facts In Hindi

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ज्यादा चॉकलेट खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा नहीं होता है, लेकिन थोड़ी मात्रा में चॉकलेट खाने पर यह दवा की तरह काम करती है। जब भी कोई बच्चा चॉकलेट खाता है तो घर के बड़े उसे ये समझाते हैं कि चॉकलेट खाना उसकी हेल्थ के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दरअसल, इसका एक कारण चॉकलेट के गुणों से अनजान होना भी है। जी हां, चॉकलेट में भी कुछ ऐसी खूबियां होती हैं, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। चलिए आज जानते हैं  Chocolate facts और उसके इतिहास से लेकर अब तक की बेहद मजेदार बाते :


चॉकलेट के प्रति अपनी दीवानगी जाहिर करने के लिए हर साल 7 जुलाई को अमेरिका में “Chocolate Day” मनाया जाता है।

Chocolate बनाने की सबसे पहली मशीन 1780 में स्पेन के बार्सीलोना में बनी थी.

Chocolate से बनी सबसे बड़ी घड़ी जर्मनी में है.

इंग्लैंड में Chocolate 1650 में पहुँचा था और अंग्रेजी कंम्पनी ने सबसे पहला Chocolate Bar 1842 में खोला था.

दुनिया के 40 % बादामों का उपयोग तो चाॅकलेट बनाने में हो जाता है।.

हर सैकेंड अमेरिका में 100 पाउंड चाॅकलेट खाई जाती है।

अमेरीका की सबसे बड़ी और पुरानी Chocolate कंम्पनी “Hershey’s” है जो कि हर साल 40 करोड़ किलो Chocolate का उत्पादन करती है.

अमेरीकी Chocolate निर्माता हर दिन दूध वाली Chocolate बनाने के लिए 15 लाख 88 हजार किलो दूध का उपयोग करते हैं.

Chocolate एकलौता ऐसा खाने वाला पदार्थ है जिसका पिघलाव दर्जा मनुष्य के शरीर से कम है. यदि आप की जुबान पर एक Chocolate का टुकड़ा रख दिया जाए तो वह पिघलना शुरू कर देगा

क्या आप जानते हैं कि चॉकलेट खांसी में फायदेमंद होती है। लंदन के चिकित्सा शोधकर्ताओं ने कोको में मिलने वाले थियोब्रोमाइन तत्व से भरपूर ऐसी चॉकलेट तैयार की है। जिसे खाकर खांसी से छुटकारा पाया जा सकता है।

दुनिया के सबसे बड़े चॉकलेट बार का वजन 5792 किलोग्राम है।

 सभी कोको वृक्ष सालाना लगभग 2,500 बीजों का उत्पादन करता है. यह बीजों का उत्पादन चार से पाँच साल की आयु में शुरू करता है.

Chocolate “कोकोआ” नाम के पेड़ के बीजों को संसोधित करने के बाद बनता है. कोको का स्वाद बहुत ही कड़वा होता है जिसे निर्माण के दौरान दूर करके स्वादिष्ट बनाया जाता है.

 कोको की खोज 4000 साल पहले पुर्वी अमरीका में हुई थी पर वर्तमान समय में दुनिया की 70 % कोको का उत्पादन अफ्रीका में होता है. इस पेड़ की फलियों में जो बीज होते हैं उनसे Chocolate को बनाया जाता है.

कोको के वृक्ष 200 साल तक जी सकते हैं. पर एक अच्छी Chocolate योग्य कोको बीजों का उत्पादन 25 साल तक ही करते हैं.

 माया सभ्यता के लोग शादी की और अन्य रस्मों में Chocolate का उपयोग करते थे. जब उनका कोई राजा मर जाता तो वह उसकी कबर में Chocolate के Jar रख देते थे.

चाॅकलेट हिटलर को भी बहुत पसंद थी, वह एक दिन में कम से कम एक किलो चॉकलेट जरूर खा जाता था


कोको के बीजों में 300 प्रकार के प्रक्रतिक फ्लेवर और 400 प्रकार की अलग-अलग सुगंध होती है.

Chocolate Industry बहुत बड़ी है और लगभग चार से पाँच करोड़ लोग इसी Industry में काम करके अपनी रोजी चलाते है. यह लगभग 38 लाख टन कोको बीजों का उत्पादन करते है.
एक रिपोर्ट के अनुसार 2010 में Chocolate का बाजार 4244 करोड़ था जो कि 2016 में 5014 करोड़ का हो जाएगा.

आपको ये जानकर हैरानी होगी की आलू के चिप्स Milk Chocolate में डुबोए जाते है।

बेल्जियम को चॉकलेट के मामले में धरती का स्वर्ग कहा जाता है। यहां चॉकलेट की 2 हजार से भी ज़्यादा दुकाने हैं।

Switzerland के लोग एक साल में 8.5 किलो Chocolate खाते है जो सबसे अधिक है. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया (8 किलो) और Ireland(7.5 किलो) का नंबर आता है. अमेरीका 11 वें स्थान पर रह जाता है

अगर चॅाकलेट कुत्ते को खिला दी जाए तो वह मर जाएगा. यह उसके दिल और नाडी मंण्डल पर प्रभाव डालती है.

जो लोग अपने आप को उदास महसूस करते है वह सामान्य से 55 % ज्यादा Chocolate खा जाते है.

Research से पता चला है कि “Dark Chocolate” खाने से दिमाग के काम करने की शक्ति बढ़ती है. इससे आँखों की क्षमता भी बढ़ती है (खराब मौसम में भी).

अध्ययन में यह बात सामने आई है कि एक चॉकलेट खाने से वजन बढ़ाने वाले भोजन की इच्छा में कमी होती है, जिससे आपका वजन नियंत्रित रहता है।

ज्‍यादा चॉकलेट खाना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इससे आप नपुंसक भी बन सकते है।

इंडियाना (अमेरिका का एक राज्य) में हुए एक अध्ययन में जिन Cyclists (साइकिल चलाने वाले खिलाड़ी) ने खेल के मध्य समय में Milk Chocolate पीया उन्होंने दूसरे Sports Drinks पीने वाले खिलाड़ियों से ज्यादा Score किए.

कुछ लोग कहते है कि Chocolate खाने से मुँहासे(Pimple) निकलते है मगर रिसर्च में ऐसा कुछ भी साबित नही हुआ है.

दूसरे महायुद्ध के दौरान जर्मन वैज्ञानिकों ने तो एक ऐसा Chocolate cover बनाया था जिसे कि एक Steel Bomb पर लपेटा जा सके. अगर Chocolate के कवर से एक टुकड़ा कटता तो सात सैंकेड़ बाद वह फट जाता था.


एक Chocolate की चिप खाने से व्यक्ति में 150 मीटर तक चलने की उर्जा आ जाती है.

प्राचीन माया सभ्यता में कोको की अच्छी फसल के लिए एक मनुष्य की बली चढ़ाई जाती थी. आम तौर पर एक कैदी को Chocolate का Cup पिलाने के बाद हलाल कर दिया जाता था


*** जिन लोगों को अचानक चक्कर आने या ब्लड प्रेशर लो होने की समस्या हो, उन्हें हमेशा अपने पास चॉकलेट रखना चाहिए। जब भी कमजोरी महसूस हो तुरंत चॉकलेट खा लें। इससे बॉडी को तुरंत एनर्जी मिलती है।

INTERESTING FACTS ABOUT TEMPLE भारत के से जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य

 ये हैं भारत के अनोखे मंदिर


हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराने धर्मों में से एक है, और दुनिया भर में 900 मिलियन से अधिक अनुयायियों है। सबसे ज्यादा हिंदुओं भारत में रहते हैं हालांकि नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया में मौजूद पर्याप्त संख्या मे रह रहे हैं। भारत विविधता का देश है।
महाराष्ट्र के या किसी और राजस्थान के रेगिस्तान में गुफाओं मे या तमिलनाडु की भूल गांवों में लद्दाख के पहाड़ों मे या हिमालय के पहाड़ी क्षेत्रों से, मंदिरों हर जगह हैं। भारत में हर सड़क पे मंदिर है। बड़े मंदिरों से छोटे मंदिरों तक।
प्राचीनकाल में जब मंदिर बनाए जाते थे तो वास्तु और खगोल विज्ञान का ध्यान रखा जाता था। इसके अलावा राजा-महाराजा अपना खजाना छुपाकर इसके ऊपर मंदिर बना देते थे और खजाने तक पहुंचने के लिए अलग से रास्ते बनाते थे।

सोमनाथ मंदिर

INTERESTING FACTS ABOUT TEMPLE  भारत के से जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य

सोमनाथ मंदिर एक महत्वपूर्ण हिन्दू मंदिर है जिसकी गिनती 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में होती है। प्राचीनकाल में इसका शिवलिंग हवा में झूलता था, लेकिन आक्रमणकारियों ने इसे तोड़ दिया। माना जाता है कि 24 शिवलिंगों की स्थापना की गई थी उसमें सोमनाथ का शिवलिंग बीचोबीच था। इन शिवलिंगों में मक्का स्थित काबा का शिवलिंग भी शामिल है। इनमें से कुछ शिवलिंग आकाश में स्थित कर्क रेखा के नीचे आते हैं।


गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। इस स्थान को सबसे रहस्यमय माना जाता है। यदुवंशियों के लिए यह प्रमुख स्थान था। इस मंदिर को अब तक 17 बार नष्ट किया गया है और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया।


यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था। श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे, तब ही शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पद्मचिह्न को हिरण की आंख जानकर धोखे में तीर मारा था, तब ही कृष्ण ने देह त्यागकर यहीं से वैकुंठ गमन किया। इस स्थान पर बड़ा ही सुन्दर कृष्ण मंदिर बना हुआ है।

केदारनाथ मंदिर



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हिमालय की गोद, गढ़वाल क्षेत्र में भगवान शिव के अलोकिक मंदिरों में से एक केदारनाथ मंदिर स्थित है. एक कहानी के अनुसार इसका निर्माण पांडवों ने युद्ध में कौरवों की मृत्यु के प्राश्चित के लिए बनवाया था. आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने इसको दोबारा restored करवाया. यह उत्तराखंड के छोटे चार धामों में से एक है जिसके लिए यहां आने वालों को 14 किलोमीटर के पहाड़ी रास्तों पर से गुजरना पड़ता है.
यह मंदिर ठन्डे ग्लेशियर और ऊंची चोटियों से घिरा हुआ है जिनकी ऊंचाई लगभग 3,583 मीटर तक है. सर्दियों के दौरान यह मंदिर बंद कर दिया जाता है. सर्दी अधिक पड़ने की सूरत में भगवन शिव को उखीमठ ले जाया जाता है और पांच-छह महीने वहीं उनकी पूजा की जाती है.

 बद्रीनाथ मंदिर

INTERESTING FACTS ABOUT TEMPLE  भारत के से जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य badrinath
उत्तराखंड  का चमोली डिस्ट्रिक्ट, अलकनंदा नदी का किनारा भगवान बद्रीनाथ के घर के नाम से भी जाता है. बद्रीनाथ मंदिर हिन्दू धर्म के चार पवित्र धामों में से एक है. इसके अलावा बद्रीनाथ में भी एक छोटा चार धाम है जिसमे भगवन विष्णु के एक सौ आठ मंदिर हैं जो भगवन विष्णु को समर्पित हैं.
भगवान विष्णु की यात्रा करने वाले लोगों का यहां तांता लगा रहता है पर यहां पर की जाने वाली यात्रा केवल अप्रैल से ले कर सितम्बर तक ही रहती है. इस मंदिर से सम्बंधित दो खास फेस्टिवल हैं जो इसकी खासियत को और बढ़ाते हैं.
माता मूर्ति का मेला: भगवान बद्रीनाथ की पूजा शुरू हो कर यह मेला सितम्बर तक चलता है जब तक कि मंदिर के कपाट बंद नहीं हो जाते. बद्री-केदार फेस्टिवल: आठ दिनों तक चलने वाला यह मेला बद्रीनाथ और केदारनाथ दोनों जगहों पर जून के महीने में मनाया जाता है.
कन्याकुमारी मंदिर
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कन्याकुमारी प्वांइट को इंडिया का सबसे निचला हिस्सा माना जा है। यहां समुद्र तट पर ही कुमारी देवी का मंदिर है। यहां मां पार्वती के कन्या रूप को पूजा जाता है। यह देश में एकमात्र ऐसी जगह है जहां मंदिर में प्रवेश करने के लिए पुरूषों को कमर से ऊपर के क्लॉथ्स उतारने होंगे।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर देवी का विवाह संपन्न न हाे पाने के कारण बचे हुए दाल-चावन बाद में कंकड़-पत्थर बन गए। कहा जाता है इसलिए ही कन्याकुमारी के बीच या रेत में दाल और चावल के रंग-रूप वाले कंकड़ बहुत मिलते हैं। आश्चर्य भरा सवाल तो यह भी है कि ये कंकड़-पत्थर दाल या चावल के आकार जितने ही देखे जा सकते हैं।


प्राकृतिक सौंदर्य : यदि आप मंदिर दर्शन को गए हैं तो यहां सूर्योदय और सूर्यास्त भी देखें। कन्याकुमारी अपने ‘सनराइज’ दृश्य के लिए काफी प्रसिद्ध है। सुबह हर विश्रामालय की छत पर टूरिस्टों की भारी भीड़ सूरज की अगवानी के लिए जमा हो जाती है। शाम को अरब सागर में डूबते सूरज को देखना भी यादगार होता है। उत्तर की ओर करीब 2-3 किलोमीटर दूर एक सनसेट प्वॉइंट भी यहां है।




 मेरू रिलीजन स्पॉट, कैलाश पर्वत 




हिमालय पर्वत के उच्चतम श्रंखला में मानसरोवर में यह बहुत पवित्र जगह है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान महादेव स्वंय विराजमान हैं। यह धरती का केंद्र है। दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित कैलाश मानसरोवर के पास ही कैलाश और आगे मेरू पर्वत स्थित हैं। यह संपूर्ण क्षेत्र शिव और देवलोक कहा गया है। रहस्य और चमत्कार से परिपूर्ण इस स्थान की महिमा वेद और पुराणों में भरी पड़ी है।


कैलाश पर्वत समुद्र सतह से 22,068 फुट ऊंचा है तथा हिमालय के उत्तरी क्षेत्र में तिब्बत में स्थित है। चूंकि तिब्बत चीन के अधीन है अतः कैलाश चीन में आता है, जो चार धर्मों- तिब्बती धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू का आध्यात्मिक केंद्र है। कैलाश पर्वत की 4 दिशाओं से 4 नदियों का उद्गम हुआ है- ब्रह्मपुत्र, सिंधु, सतलुज व करनाली।