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Interesting facts about bhagat singh भगत सिंह से जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य


सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में हंसते-हंसते सूली चढ़ जाने वाले भगत सिंह, शहीद होने के 84 वर्षों बाद तक वह आज भी देश के युवाओं के आदर्श हैं। उनका जिक्र पीएम नरेंद्र मोदी प्रवासी भारतीयों के बीच दी गई अपनी स्‍पीच में करते हैं ताकि वहां रहने के बाद भी वे उनसे प्रेरणा लेते रहें। आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह की शहादत का दिन है। जी हां 23 मार्च जब वो हंसते-हंसते देश के लिये सूली पर चढ़ गये थे।




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छोटी उम्र से ही उनके मन में ब्रिटिश राज के खिलाफ विद्रोह की आग थी।

भगत सिंह जब बच्‍चे थे उस समय से ही वह बंदूकों की खेती करने की बातें करते थे। 

जलियांवाला बाग घटना के समय भगत सिंह की उम्र सिर्फ 12 वर्ष थी। 

घटना वाले दिन वह स्‍कूल से भागकर जलियांवाला बाग पहुंचे।

उन्‍होंने खून से सनी मिट्टी को एक बोतल में रख लिया था।

लेनिन, मार्क्‍स और ट्रॉटस्‍काई को पढ़ते-पढ़ते भगत सिंह एक नास्तिक बन गए थे। यहां तक कि उन्‍होंनें सिख धर्म से जुड़ी मान्‍यताओं को भी मानना छोड़ दिया था। 

भगत सिंह रोज इस बोतल की पूजा करते थे।

भगत सिंह ने सेंट्रल एसेंबली पर ब्रिटिश सरकार को डराने के मकसर से बम फेंका था।

उन्‍होंने साथियों के साथ मिलकर इसे खराब स्‍तर वाले एस्‍सप्‍लोसिव्‍स से तैयार किया था।

भगत सिंह ने ब्रिटिश राज से लड़ाई के खिलाफ देश को 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा दिया था। 

भगत सिंह छोटी उम्र से ही समाजवाद से प्रेरित थे। इस विषय पर अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए वह लेनिन और उनकी अगुवाई वाले क्रांतियों के बारे में पढ़ते रहे थे। 


लेनिन, मार्क्‍स और ट्रॉटस्‍काई को पढ़ते-पढ़ते भगत सिंह एक नास्तिक बन गए थे। यहां तक कि उन्‍होंनें सिख धर्म से जुड़ी मान्‍यताओं को भी मानना छोड़ दिया था। 


भगत सिंह सिर्फ एक क्रांतिकारी ही नहीं थे बल्कि एक लेखक भी थे। उस दौर में छपने वाले कई अखबारों में उनके लेख छपते थे।  


भ्‍रगत सिंह जिस समय लाहौर जेल में थे उन्‍होंने एक डायरी बनाई हुई थी। इस डायरी में वह आजादी और क्रांति के बारे में अक्‍सर कुछ न कुछ लिखा करते थे।


भगत सिंह जब जेल मेें पहुुंचे थे तो ब्रिटिश अधिकारी काफी परेशान हो गए थे। उनसे बात करके जेल में बंदी बाकी कैदी अंग्रेज राज के खिलाफ नए तरह से विरोध का तरीका निकाल लेते थे। 


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